शिक्षिका हिंदी संस्कृत
साहित्य क्षेत्र,साहित्य अध्ययन ,सांस्कृतिक ,साहित्यिक ,सामाजिक,शैक्षणिक
आइसक्रीम वाले की "टन टन" घंटी की आवाज सुनकर भाई ने जिद की-" मां ,मां ! आइसक्रीम वाला इधर ही आ रहा है आइसक्रीम दिला दो ना" मां ने अपने पल्लू की गांठ खोलते हुए आइसक्रीम वाले को पैसे देते हुए कहा -"भैया !दो आइसक्रीम देना"
आइसक्रीम वाले के हाथों से नीतू के भाई और नीतू ने आइसक्रीम ले ली नीतू ने अभी आइसक्रीम हाथ में लेकर उसे खाने के लिए मुंह खोला ही था कि भाई ने मां से कहा - "दोनों आइसक्रीम मुझे ही चाहिए, मैं ही खाऊंगा" मां ने नीतू को समझाते हुए कहा - अभी छोटा है ना, जिद्दी है ,तू बड़ी दीदी समझदार है "मां के कहने पर नीतू ने अपनी आइसक्रीम भाई को दे दी । नीतू के हिस्से की आइसक्रीम भाई के हाथों से पिघल कर जमीन पर गिर रही थी भाई के सो जाने पर मां ने नीतू के माथे पर प्यार से हाथ फेरते हुए गोद में लेकर उसे समझाया - " अभी तबियत ठीक नहीं है उसकी और नासमझ है, जब समझदार होगा ,तब देखना, यही तेरा सबसे ज्यादा ध्यान रखेगा ।
फिर मां ने नीतू को भी उसके पापा के साथ आइसक्रीम खाने के लिए भेजा. नीतू का बाल मन आइसक्रीम खाकर खुश हो उठा था .उसके बाद से नीतू भाई के जिद करते ही अपनी सभी चीजें चुपचाप उसे दे दिया करती थी और उसे रोने नहीं देती थी । बाद में धीरे से मां पापा उसे भी सभी चीजें लाकर दे दिया करते थे .मां का प्यार से अपने सिर पर घुमाया हुआ हाथ नीतू को मिठास से भर शीतल एहसास दिया करता था।
वक्त पंख लगा कर उड़ता रहा ।दोनों भाई बहन पढ़ लिखकर नौकरी करने लग गए और विवाह होने के साथ बाल बच्चों वाले हो गए ।गर्मी के दिन थे ,नीतू शाम का खाना बना कर अभी रसोई से फुर्सत में हुई ही थी कि अचानक दरवाजे की घंटी बजी ।नीतू ने अपने बेटे आशु से कहा- "जा जाकर दरवाजा खोल दे, देख कौन है! आशु ने दरवाजा खोला और खुश होकर पास आकर बोला - "मामा मामा आए हैं "सोफे पर बैठे हुए नीतू के हाथों में आइसक्रीम के दो बड़े पैकेट थमाते हुए भाई बोला- " लो! दीदी ,जल्दी से आइसक्रीम प्लेट में डालकर दे दो ,कहीं पिघल ना जाए" दोनों भाई बहन एक दूसरे को देखकर मुसकरा उठे। आइसक्रीम के दोनों पैकेट हाथों में थामे नीतू इस भीषण गर्मी में भी शीतल मिठास महसूस कर रही थी ।